LIVE UPDATE
झमाझम खबरेंदेशप्रदेशराजनीतीरायपुर

मरवाही वनमंडल में ‘बाबू राज’ हावी: आधा दर्जन DFO बदले, पर कैम्पा शाखा प्रभारी भूपेंद्र साहू और मुख्य लिपिक शैल गुप्ता अडिग — ट्रांसफर आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित!

मरवाही वनमंडल में ‘बाबू राज’ का बोलबाला: आधा दर्जन DFO बदले, पर भूपेंद्र साहू और शैल गुप्ता अडिग — ट्रांसफर आदेश बेअसर !

आधा दर्जन DFO बदले, लेकिन ‘चहेते बाबू’ अडिग — ट्रांसफर आदेश कागजों में, जमीनी हकीकत शून्य

ये खबर भी पढ़ें…
बलरामपुर में साइकिल वितरण पर बड़ा सवाल: गुणवत्ता जांच में अफसर फेल, कलेक्टर ने मांगा जवाब; बाकी जिलों में कार्रवाई कब?
बलरामपुर में साइकिल वितरण पर बड़ा सवाल: गुणवत्ता जांच में अफसर फेल, कलेक्टर ने मांगा जवाब; बाकी जिलों में कार्रवाई कब?
August 12, 2026
बलरामपुर में साइकिल वितरण पर बड़ा सवाल: गुणवत्ता जांच में अफसर फेल, कलेक्टर ने मांगा जवाब; बाकी जिलों में कार्रवाई...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही|मरवाही वनमंडल में इन दिनों “बाबू राज” चरम पर नजर आ रहा है। आरोप है कि डीएफओ कार्यालय में कुछ लिपिक वर्गीय कर्मचारी पिछले 10 वर्षों से एक ही शाखा में जमे हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान आधा दर्जन से ज्यादा DFO बदले, लेकिन इन कर्मचारियों की कुर्सी नहीं हिली।
सूत्र बताते हैं कि इन कर्मचारियों को पूर्व से लेकर वर्तमान DFO तक का “विशेष संरक्षण” प्राप्त है, जिसके चलते सामान्य प्रशासन के नियम और ट्रांसफर आदेश भी बेअसर साबित हो रहे हैं।
कैम्पा शाखा बना ‘स्थायी अड्डा’? आरोप है कि भूपेन्द्र साहू नामक कर्मचारी पिछले 10 वर्षों से कैम्पा शाखा में ही जमे हुए हैं। प्रमोशन के बाद भी उन्हें वहीं का प्रभारी बना दिया गया।
बताया जाता है कि उन्हें हटाने के लिए 6 से अधिक बार आदेश जारी हुए, लेकिन एक भी आदेश जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो सका। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
इतना ही नहीं, इस कर्मचारी पर गोबर खरीदी में फर्जीवाड़ा और कूटरचना जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं, जिनकी गूंज विधानसभा तक पहुंच चुकी है—फिर भी कार्रवाई शून्य है। मुख्य लिपिक पद पर भी ‘सेटिंग’ का खेल?
सैल गुप्ता के मामले में भी नियमों को दरकिनार करने के आरोप सामने आए हैं। सहायक ग्रेड-2 रहते हुए वे वर्षों तक व्यय-1 शाखा में पदस्थ रहीं और प्रमोशन के बाद भी उसी वनमंडल में मुख्य लिपिक के पद पर बनी रहीं।
सूत्रों का दावा है कि समिति से राशि आहरण की अनुमति में भारी अनियमितताएं हुईं। यहां तक कि सुरक्षा निधि के नाम पर फर्जी प्रस्ताव बनाकर पैसों का दुरुपयोग किए जाने के आरोप भी लगे हैं।
वर्तमान में उनके पास मुख्य लिपिक के साथ-साथ व्यय-1 शाखा का भी प्रभार है — यानी एक ही जगह 10 साल से “डबल पावर”!सवाल बड़ा है…आखिर क्यों 10 साल से जमे कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं?
क्यों ट्रांसफर आदेश सिर्फ फाइलों में दबकर रह जाते हैं? क्या “अंदरखाने की सेटिंग” प्रशासन पर भारी पड़ रही है? अब निगाहें DFO पर
मरवाही वनमंडल में उठते इन गंभीर आरोपों के बीच अब सबकी नजर DFO पर टिकी है। देखना होगा कि वे कब तक इन मामलों पर ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर “बाबू राज” यूं ही चलता रहेगा।

ये खबर भी पढ़ें…
किसानों की समृद्धि से ही समृद्ध होगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
किसानों की समृद्धि से ही समृद्ध होगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
August 12, 2026
किसानों की समृद्धि से ही समृद्ध होगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय किसान प्रदेश की प्रगति की धुरी,...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

Back to top button
error: Content is protected !!